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नीतीश के बाद कौन?
- Reporter 12
- 03 Apr, 2026
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद बिहार में नई सरकार के गठन और अगले मुख्यमंत्री को लेकर सियासी हलचल तेज होने की संभावना है।
पटना, आलम की खबर।
बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े मोड़ की ओर बढ़ती दिख रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की खबर के बाद अब राज्य में सत्ता परिवर्तन, नई सरकार के गठन और अगले मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि 10 अप्रैल के बाद बिहार में घटनाक्रम काफी तेजी से आगे बढ़ सकता है। शपथ ग्रहण के बाद दिल्ली और पटना के बीच होने वाली बैठकों को अब सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि सरकार के अगले चरण की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
दिल्ली दौरा और बढ़ी सियासी हलचल
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 9 अप्रैल को दिल्ली रवाना हो सकते हैं और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इस कार्यक्रम के बाद उनकी एनडीए के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की संभावना जताई जा रही है।
इन मुलाकातों को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि बिहार में सत्ता संरचना को लेकर जो चर्चा चल रही है, उसका अगला संकेत यहीं से निकल सकता है। यह साफ है कि दिल्ली में होने वाली बातचीत सिर्फ शपथ तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा पर भी असर डाल सकती है।
14 अप्रैल के बाद तेज हो सकती है सरकार गठन की प्रक्रिया
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो सकती है। माना जा रहा है कि 14 अप्रैल के बाद इस दिशा में औपचारिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
इससे पहले एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाए जाने की भी संभावना है। ऐसी बैठकें सामान्यत: तब ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती हैं, जब नेतृत्व परिवर्तन या सत्ता संरचना में बदलाव की पृष्ठभूमि तैयार हो रही हो।
यही वजह है कि बिहार में अब सिर्फ यह सवाल नहीं है कि नीतीश कुमार आगे क्या करेंगे, बल्कि यह भी है कि उनके बाद सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी।
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जदयू की बैठक भी मानी जा रही अहम
राज्यसभा शपथ और संभावित राजनीतिक फेरबदल के बीच जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक भी चर्चा में है। यह बैठक 20 अप्रैल के आसपास या उसके बाद होने की संभावना जताई जा रही है।
हाल ही में पार्टी के संगठनात्मक चुनाव पूरे हुए हैं और उसमें एक बार फिर नीतीश कुमार को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। ऐसे में यह बैठक महज संगठनात्मक औपचारिकता नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पार्टी के अगले राजनीतिक संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
संभावना यह भी जताई जा रही है कि इस बैठक में कई राजनीतिक प्रस्ताव, संगठनात्मक संदेश और आगे की रणनीति पर मुहर लग सकती है।
राज्यसभा से पहले सुरक्षा बढ़ी, मिला Z प्लस कवर
राजनीतिक हलचल के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। उन्हें जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है।
गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, उनकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। राज्यसभा सदस्य के रूप में उनकी नई भूमिका और संभावित राजनीतिक परिवर्तन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
यह कदम इस बात का भी संकेत माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में उनकी राजनीतिक भूमिका सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि दिल्ली की सक्रिय राजनीति में भी उनका दायरा बढ़ सकता है।
सीएम पद को लेकर अटकलें तेज
सबसे बड़ा सवाल फिलहाल यही है— अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
यही वह बिंदु है, जहां बिहार की राजनीति सबसे ज्यादा गर्म है। अभी तक एनडीए की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सत्ता के गलियारों में कई नामों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
बीजेपी से कौन?
भाजपा खेमे में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में बताया जा रहा है। उन्हें संगठन और सत्ता, दोनों स्तरों पर सक्रिय चेहरा माना जाता है।
जदयू से कौन?
दूसरी ओर, जदयू खेमे में निशांत कुमार का नाम भी चर्चा में है। राजनीतिक हलकों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या जदयू भविष्य की राजनीति में परिवार आधारित नया चेहरा आगे बढ़ाने की तैयारी में है, या फिर यह सिर्फ सियासी चर्चा भर है।
फिलहाल, इन तमाम चर्चाओं पर न तो भाजपा और न ही जदयू की ओर से कोई स्पष्ट मुहर लगी है। लेकिन राजनीति में अक्सर जहां धुआं दिखता है, वहां कुछ न कुछ पक जरूर रहा होता है।
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क्या बिहार में शांत तरीके से होगा सत्ता परिवर्तन?
बिहार की राजनीति में यह बदलाव अगर होता है, तो यह सिर्फ चेहरा बदलने भर का मामला नहीं होगा। इसके साथ कई बड़े सवाल भी जुड़ेंगे—
क्या नई सरकार पुराने एजेंडे पर ही चलेगी?
क्या गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन बदलेगा?
क्या भाजपा इस मौके पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहेगी?
क्या जदयू अपने राजनीतिक अस्तित्व को नई संरचना में सुरक्षित रख पाएगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले कुछ दिनों में ही साफ होने लगेंगे।
राजनीतिक संदेश भी कम अहम नहीं
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना अगर औपचारिक रूप से सत्ता परिवर्तन का रास्ता बनाता है, तो इसका मतलब यह भी होगा कि बिहार में नई पीढ़ी, नया संतुलन और नई राजनीतिक प्राथमिकताएं सामने आ सकती हैं।
यह बदलाव अगर एनडीए के भीतर सहमति से होता है, तो उसे स्थिरता का संकेत माना जाएगा। लेकिन अगर चेहरे को लेकर अंदरूनी खींचतान बढ़ती है, तो आने वाले समय में गठबंधन के भीतर असहजता भी सामने आ सकती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, 10 अप्रैल की तारीख अब बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम बन गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राज्यसभा शपथ सिर्फ एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता के अगले अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
नीतीश के बाद बिहार की कुर्सी किसके पास जाएगी?
आने वाले कुछ दिन इस सवाल का जवाब तय कर सकते हैं, और साथ ही बिहार की राजनीति की नई दिशा भी।
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